कभी माफिया का डर तो कभी पारिवारिक सम्पत्ति बता कर हड़प ली गई वक़्फ़ सम्पत्ति।
पहले इमामबाड़ा ध्वस्त करके हुआ दुकानों का निर्माण अब इमाम चौक भी वक़्फ़ के लुटेरों की नज़र में।
मनव्वर रिजवी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
पहले इमामबाड़ा ध्वस्त कर दुकानों का निर्माण कराया गया और अब इमाम चौक पर भी भूमाफियाओं की नज़र है। बात वक़्फ़ इमामबाड़ा भुआ शहीद (शाहमारूफ़) की हो रही है। सबसे बड़ी बात ये है कि वक़्फ़ बोर्ड जिनको मोतवल्ली बनाकर सम्पत्तियों का केयर टेकर नियुक्त करता है जिनका काम वक़्फ़ की देख रेख करना होता है लेकिन ये रखवाले ही इनके मालिक बन जाते हैं और अपनी मर्ज़ी से सम्पत्तियों में हेर फेर करके मुनाफा वसूलते हैं।
आपको बता दें कि पूरे भारत में वक़्फ़ की सम्पत्तियां दो हिस्सों में बंटी है एक कि देखरेख सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड तो दूसरे की देख रेख शिया वक़्फ़ बोर्ड के जिम्मे है। रेलवे और सेना के बाद पूरे भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीने वक़्फ़ की हैं। अकेले गोरखपुर जिले में ही सुन्नी और शिया वक़्फ़ बोर्ड के तहत लगभग 1200 से ज़्यादा वक़्फ़ दर्ज हैं जिनकी कुल सम्पत्ति हज़ारों एकड़ में है लेकिन ये सारी वक़्फ़ संपत्तियों पर अब अपराधी और वक़्फ़ माफियायों का या तो कब्ज़ा है या फिर ऐसे लोगों की नज़र इन सम्पत्तियों पर है।
गोरखपुर में स्थित वक़्फ़ नम्बर 67 इमामबाड़ा स्टेट गोरखपुर ही नही बल्कि पूर्वांचल के सबसे बड़ा वक़्फ़ है जिसके पास आज भी हज़ारों एकड़ की सम्प्पति है।
इसके अलावा अंजुमन इस्लामिया भी बड़ा वक़्फ़ है जिसके अंतर्गत दर्जनों वक़्फ़ हैं जिनकी सम्पत्तियों का अंदाज़ लगाना मुश्किल है, ये दोनों सम्पत्तियां सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज है इसके अलावा शिया वक़्फ़ बोर्ड में दर्ज वक़्फ़ नम्बर 1524 वक़्फ़ अशरफुननिशा खानम के अंतर्गत गोरखपुर, कुशीनगर, सन्तकबीरनगर, सिद्धार्थनगर जिले में करोड़ों की सम्पत्ति वक़्फ़ अभिलेखों में दर्ज है ।
आज स्थिति ये है कि वक़्फ़ की तमाम सम्पत्तियों को इसकी देख रेख की ज़िम्मेदारी सम्भालने वालों ने अपने और अपने परिवार के नाम दर्ज करा लिया और बहुत सी सम्पत्तियों को बेंच कर करोड़ों का चूना वक़्फ़ के साथ साथ सरकार को लगा रहे हैं।
बात शाहमारूफ़ के भुआ शहीद इमामबाड़े की करें तो यहां के मुतवल्ली से मिलकर पहले माफियाओं ने इमामबाड़े को ध्वस्त किया और फिर वहां मनमानी ढंग से दुकानों का निर्माण करा दिया। इतना ही नही दबंगों ने इतनी जमीन भी नही छोड़ी जिससे प्रथम तल पर जाने के लिए सीढ़ी बनाई जा सके। इसके लिए सड़क पर सीढ़ी बनाकर ऊपर वाली मंज़िल पर जाने का रास्ता बना लिया गया। इस मामले की शिकायत तहसील से लेकर अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और गोरखपुर विकास प्राधिकरण तक हुई लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही हुई। आपकों बता दें कि शाहमारूफ़ में दुकानों का रेट बहुत हाई है यहां दुकानों को किराए पर लेने के लिए 15 से 20 लाख या उसी ज़्यादा रुपये पगड़ी के रूप में मिल जाते हैं, बाकी हर माह मोटा किराया अलग से मिलता है। इसी कारण अब मोतवल्ली यहां इमाम चौक के स्थान पर भी दुकाने बनवाने के प्रयास में हैं इसके लिए 26 जनवरी को बाकायदा यहां नाप जोख भी कराई गई।
इससे पहले यहां भूतल पर बना इमामबाड़ा ध्वस्त कर दुकानों का निर्माण किया जा चुका है।
वक़्फ़ सम्पत्तियों को लेकर समय समय पर ऐसी तमाम शिकायत हुई लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
बहरहाल योगी सरकार की वक़्फ़ सम्पत्तियों को लेकर जारी किए जाने वाले तमाम आदेश के बाद ऐसा लग रहा है कि देर सवेर इन लुटेरों की भी बारी आएगी।