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धार्मिक / Jun 22, 2026

छठवीं मुहर्रम : कर्बला के शहीदों की याद में लबों पर जारी 'या हुसैन' की सदा।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

छठवीं मुहर्रम को मस्जिदों व घरों में ‘जिक्रे शुहदाए कर्बला’ महफिलों का दौर जारी रहा। फातिहा ख्वानी हुई। कर्बला के शहीदों की याद में लबों पर जारी रही 'या हुसैन' की सदा। गौसे आजम फाउंडेशन ने शहर में कई जगहों पर लंगरे हुसैनी बांटा। लंगर बांटने में जिलाध्यक्ष समीर अली, रियाज अहमद, हाफिज मुहम्मद शारिक, सैयद शहाबुद्दीन, जुनैद खान, नूर मुहम्मद दानिश, अहसन खान, मुहम्मद फैज, अमान अहमद आदि शामिल रहे। 

मकतब इस्लामियात चिंगी शहीद इमाम चौक तुर्कमानपुर में महफिल जिक्रे शुहदाए कर्बला के तहत मुहम्मद अनस ने कहा कि इस्लाम धर्म और इंसानियत को बचाने के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने कुनबे और साथियों की कुर्बानी कर्बला के मैदान में दी। हाफिज रहमत अली ने तिलावत की। कासिद रजा ने नात व मनकबत पेश की।

गुलशने रजा एकेडमी तुर्कमानपुर में आलिमा सबीहा खातून व गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि कर्बला के मैदान में हजरत फातिमा के दुलारे इमाम हुसैन जैसे ही फर्शे जमीन पर आए कायनात का सीना दहल गया। इमामे हुसैन को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान पर इस्लाम धर्म की हिफाजत के लिए तीन दिन व रात भूखा प्यासा रहना पड़ा। अपने भतीजे हजरत कासिम की लाश उठानी पड़ी। हजरत जैनब के लाल का गम बर्दाश्त करना पड़ा। छह माह के नन्हें हजरत अली असगर की सूखी जुबान देखनी पड़ी। हजरत अली अकबर की जवानी को खाक व खून में देखना पड़ा। हजरत अब्बास के कटे बाजू देखने पड़े, फिर भी हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम धर्म को बुलंद करने के लिए सब्र का दामन नहीं छोड़ा।

सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का काफिला 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में पहुंचा। इस काफिले के हर शख्स को पता था कि इस रेगिस्तान में भी उन्हे चैन नहीं मिलने वाला और आने वाले दिनों में उन्हें और अधिक परेशानियां बर्दाश्त करनी होंगी। बावजूद इसके सबके इरादे मजबूत थे। अमन और इंसानियत के मसीहा का यह काफिला जिस वक्त धीरे-धीरे कर्बला के लिए बढ़ रहा था, रास्ते में पड़ने वाले हर शहर और कूचे में जुल्म और प्यार के फर्क को दुनिया को बताते चल रहा था। अंत में दुरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में एकता, भाईचारे व आपसी प्रेम मजबूत करने की दुआ मांगी गई।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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