Tranding
Mon, 13 Apr 2026 04:30 PM

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर, बेतिया डीपीआरओ के द्वारा कार्यक्रम आयोजित नहीं करना खेद

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके से जिला स्तर पर कोई कार्यक्रम काआयोजन नहीं होना पत्रकार के सम्मान को ठेस पहुंचाना जैसा है,विगत

कई वर्षों से जिला समाहरणालय के सभागार में प्रत्येक वर्ष इस कार्यक्रम काआयोजन किया जाता रहा है,मगर पता नहीं किस कारणवश इस विशेष दिन पर कोई कार्यक्रम का नहीं होना आश्चर्यजनक है। इस तथ्य से

इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रत्येक वर्ष 16 नवंबर को स्वतंत्र और दायित्वपूर्ण प्रेस की भूमिका को मान्यता प्रदान करने के लिए मनाया जाता है यह दिन भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना की उपलक्ष में भी मनाया जाता है।परिषद ने 1966 में इसी दिनअपना कामकाज शुरू किया था।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर सबों की मान्यता है कि एक कागज,एक बूंद स्याही से रातोरात पलट गया हुकूमत का पासा,यही है भारतीय प्रेस की साहस गाथा। राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के मौके पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता के संघर्ष की एक प्रेरणादायक है कि कलम की ताकत तलवार से भी ज्यादा होती है।आज के इस डिजिटल युग में भी मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है,पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि सच और समाज के बीच एक मजबूत पुल का काम करते हैं,चाहे कठिन परिस्थितियों हो या निर्धनता, प्रतिबद्धता के साथ हो,सच को सामने लाते हैं।आमजनों को विभिन्न ज्वलंत समस्याओं से जागृत भी करते हैं,समाज कोआईना दिखाने का भी काम करते हैं।नेशनल प्रेस डे इसी समर्पण,साहस,निष्पक्ष पत्रकारिता को सम्मान देने का दिन है।राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर कार्यक्रम काआयोजन,जिला स्तर पर नहीं होना बहुत ही शर्मनाक बात है, इससे पत्रकारों के हौसले पस्त हो गए है,संबंधित पदाधिकारी मुक्तदर्शक बने हुए हैं।इनको इस बात का एहसास भी नहीं हुआ की राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर कार्यक्रम भी कराना होगा, इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जिला सूचना जनसंपर्क पदाधिकारी(डीपीआरओ) कितना जागरूक हैं,साथ ही इनका कार्यक्रम नहीं कराना इनके लापरवाही का द्योतक है

India khabar
56

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap