Tranding
Tue, 14 Apr 2026 01:24 AM
धार्मिक / Jul 12, 2024

सब्र की मेराज का नाम इमाम हुसैन है - उलमा किराम

जुमा की तकरीर में बयां हुई कर्बला की दास्तान

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

पांचवीं मुहर्रम को मस्जिदों, घरों व इमामबाड़ों में ‘जिक्रे शोह-दाए-कर्बला’ महफिलों का दौर जारी रहा। फातिहा ख्वानी हुई। जुमा की तकरीर में ‘शोह-दाए-कर्बला’ का जिक्र सुनकर सबकी आंखें भर आईं। 

मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपने साथियों के साथ यजीद की कई गुना बड़ी फौज के साथ किसी मंसब, तख्तोताज, बादशाहत, किसी इलाके को कब्जाने अथवा धन-दौलत के लिए जंग नहीं की बल्कि पैगंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दीन-ए-इस्लाम व इंसानियत को बचाने के लिए जंग की थी।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाज़ार में हाफ़िज़ रहमत अली निजामी ने कहा कि यज़ीदियत हर दौर में हुसैनियत से हारती रहेगी क्योंकि हक़ से कभी बातिल जीत नहीं सकता। जब परेशानी आए तो सब्र से काम लेना है। वर्तमान दौर में हजरत हसन-हुसैन की शहादत को याद कर स्वच्छ समाज निर्माण करने की जरूरत है।

गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने कहा कि इमाम हुसैन व उनके साथियों ने यजीद फौज की बर्बता के सामने इस्लाम के अलम (झंडे) को झुकने नहीं दिया। वह अपने परिवार समेत जालिमों के हाथों शहीद हो गए, लेकिन दुनिया को संदेश दे गए कि सही कदम उठाने वाला शहीद होकर भी हमेशा ज़िंदा रहता है। सब्र की मेराज का नाम इमाम हुसैन है।

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में मौलाना महमूद रज़ा कादरी ने कहा कि इमाम हुसैन अपने इल्म, अख्लाक, बहादुरी, तकवा, परहेजगारी, इबादत और किरदार की वजह से बहुत ज्यादा मकबूल हैं। बुराई का नाश करने के लिए पैग़ंबरे इस्लाम के नवासे हज़रत फातिमा के जिगर के टुकड़े हज़रत अली के सुपुत्र इमाम हुसैन, उनके परिवार व साथियों सहित कुल 72 लोगों ने शहादत दी। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो शांति की दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। 

-----------

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
126

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap