हवन करके गौ माता की महिमा का बखान।
श्रवण कुमार गुप्ता
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गौ सेवा गतिविधि के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रांत कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन प्रातः सरस्वती शिशु मंदिर, पक्कीबाग परिसर में विधि-विधान से हवन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यकर्ताओं ने आहुति देकर गौ माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की तथा राष्ट्र एवं समाज की समृद्धि की कामना की। अखिल भारतीय प्रशिक्षण प्रमुख ई.एन. राघवन जी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हवन कार्यक्रम ने उपस्थित कार्यकर्ताओं के मन में सेवा, संस्कार और प्रकृति के प्रति समर्पण की भावना को और दृढ़ किया।
हवन के उपरांत आयोजित बौद्धिक सत्र में प्राकृतिक कीट नियंत्रण विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय ऋषियों और पूर्वजों ने कृषि को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक बनाए रखने के लिए गौ आधारित उत्पादों का उपयोग किया। गाय के गोबर, गौमूत्र, नीम, धतूरा, लहसुन आदि प्राकृतिक तत्वों से कीटनाशक तैयार करने की पारंपरिक विधियों को विस्तार से समझाया गया। यह भी बताया गया कि रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि गौ आधारित जैविक कीटनाशक पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं।
क्षेत्र सह संयोजक सर्वजीत ने गो महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता को जीवनदायिनी के रूप में देखा गया है। गोरक्ष प्रांत संयोजक अखिलेश जी ने कहा कि गौ आधारित कृषि पद्धति से किसानों की लागत कम होती है और भूमि की उर्वरता दीर्घकाल तक सुरक्षित रहती है। गौ सेवा का कार्य राष्ट्र सेवा से जुड़ा हुआ है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था तीनों को लाभ मिलता है। प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य गौ आधारित जीवन पद्धति, जैविक कृषि तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। गौ सेवा के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं स्वस्थ भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
प्रशिक्षण वर्ग में अखिलेश्वर धर द्विवेदी, डा. के. सुनीता, प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख राजकुमार, सह संयोजक फूलबदन, गौ चिकित्सा आयाम प्रमुख डॉ. संजय श्रीवास्तव,, अविरल, ओमप्रकाश त्रिपाठी, सत्येंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, शिवम, केशव, गणेश चौधरी, मणिशंकर तिवारी, भागवत पांडेय, विनोद, सुनील दूबे सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।