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Sun, 08 Nov 2026 09:00 AM

प्रेस की स्वाधीनता की मजबूती हेतु पत्रकार एवं मीडिया कर्मी ही सक्षम।

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

प्रेस की स्वाधीनता हेतु पत्रकारों एवं मीडिया कर्मीयों की भुमिका "विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 16 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन,मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट,भारतीयऑल मीडिया पत्रकार संघ एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया,जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों,बुद्धिजीवियों एवं छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ.एजाजअहमद अधिवक्ता,डॉ.सुरेश कुमार अग्रवाल,डॉ.शाहनवाज अली, वरिष्ठ पत्रकार सह संस्थापक भारतीय मीडिया पत्रकार संघ सह संस्थापक मदर ताहिरा चैरिटेबल ट्रस्ट,डॉ अमानुल हक,सामाजिक कार्यकर्ता नविन्दु चतुर्वेदी,शाहीन परवीन ने संयुक्त रूप से उन पत्रकारों मीडियाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की,जिन्होंने रिपोर्टिंग और कर्तव्य का पालन करते हुएअपने प्राणों की आहुति दे दी।दुनिया भर में 2025 में लगभग 250 सेअधिक पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों ने अपने कर्तव्य एवं रिपोर्टिंग के दौरान शहीद हुए,जिसमें से अधिकपत्रकार एवं मीडिया कर्मी फिलिस्तीन,इजराइल, युद्ध में मारे गए हैं।दर्जनों पत्रकार घायल एवं लापता है। इस मंच के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्व बिरादरी से पुनःअपील करते हैं कि पत्रकारों,मीडिया कर्मियों, संयुक्त संघ,कर्मियों,स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं आमजन मानस के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाए। इसअवसर पर एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया इसका विषय था" प्रेस की स्वाधीनता लोकतंत्र की मजबूती एवं नई पीढ़ी के पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों की भूमिका"इस अवसर पर, 1857 में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भारत के पहले भारतीय समाचार पत्र के संपादक सह स्वतंत्रता सेनानी मौलवी मोहम्मद बशीर को अंग्रेजों ने निष्पक्ष एवं स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए फांसी दी गई थी। राष्ट्रीय प्रेस दिवस उन राष्ट्रीय अवसर में से एक है जब हम सब मिलकर लोकतंत्र की मजबूती प्रेस की स्वाधीनता पर खुलकर बात करते हैं. यह दिन एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस की उपस्थिति का प्रतीक है।16 नवंबर, 1966 को भारत में राष्ट्रीय प्रेस दिवस की शुरुआत पत्रकारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य के लिए खुद को फिर से समर्पित करने काअवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 4 जुलाई 1966 को भारत में प्रेस काउंसिल की स्थापना हुई,जिसने 16 नवंबर 1966 से अपनाऔपचारिक कार्य प्रारंभ किया,तभी से16 नवंबर को 'राष्ट्रीय प्रेस दिवस' के रूप में मनाया जाता है। आज दुनिया के लगभग 50 देशों में प्रेस काउंसिल या मीडिया काउंसिल है। भारत में प्रेस को 'वॉचडॉग' और प्रेस काउंसिलऑफ इंडिया को 'नैतिक वॉचडॉग' कहा गया है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस हमारा ध्यान प्रेस की स्वतंत्रता और जिम्मेदारियों कीओर आकर्षित करता है।

 प्रथम प्रेसआयोग ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने और पत्रकारिता में उच्च आदर्श स्थापित करने के उद्देश्य से भारत में एक प्रेस परिषद की कल्पना की।वर्तमान समय में पत्रकारिता का क्षेत्र व्यापक हो गया है।पत्रकारिता जन-जन तक सूचनात्मक, शिक्षाप्रद एवं मनोरंजक संदेश पहुँचाने की कला एवं पद्धति है। इस मौके पर वक्ताओं ने नई पीढ़ी के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों काआह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को पत्रकारिता की आजादीऔर लोकतंत्र की मजबूती के लिए आगेआना चाहिए।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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