नल-जल योजना हो गई फेल,बिजली नहीं तो पानी नहीं की समस्या उजागर।
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
इन दिनों मुख्यमंत्री का सर्व परियोजना ,महत्वाकांक्षी योजना नल से जल योजना शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र दिखा दिखावा बनकर रह गया है। नल से जल योजना के अंतर्गत पानी की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है,बिजली नहीं तो पानी नहीं की व्यवस्था पर तमाचा लग रहा है, बिजली नहीं रहने के कारण पानी केआपूर्ति नहीं हो पा रही है,इस भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं,मगर विभाग है कि मूकदर्शक बना हुआ है, विभाग की लापरवाही, शिथिलता सेआम जनता परेशान है। इस योजना के क्रियान्वयन में,स्थानीय लोगों, नागरिक मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि जिस कंपनी को योजना का कार्य सौंपा गया है,वह केवल तय अवधि तक काम चलाने की मंशा से काम कर रही है।
सबसे बड़ी समस्या यह यह खड़ी हो गई है कि पानी की सप्लाई पूरी तरह बिजली पर निर्भर है।बिजली कटते ही कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बंद हो जाती है। ऐसे में करोड़ों की लागत से बनी पानी टंकियों की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है किअगर किसी गांव या मोहल्ले मेंअचानक आग लग जायेगा तो बिजली नहीं रहने पर पानी की उपलब्धता कैसे होगी?टंकियों में हमेशा पर्याप्त पानी रहना चाहिए, वैकल्पिक व्यवस्था जैसे जेनरेटर या सोलर सिस्टम भी होना चाहिए। इस वैकल्पिक व्यवस्था के नहीं रहने सेआम जनता तरसत है।
नागरिक मंच के लोगों ने संवाददाता को बताया कि योजना की उच्चस्तरीय जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कई जगहों पर पानी टंकियों में लीकेज की शिकायत भी सामनेआई है,जिसे लोग भविष्य के लिए खतरे की घंटी मान रहे हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। विभाग की उदासीनता,लापरवाही ही इस परियोजना में मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिन विभागीयअभिकर्ता के द्वारा कार्य का निष्पादन किया गया है,वह गुणवत्तापूर्ण नहीं है,इसका उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए,साथ ही दोषी अधिकारियों से राशि की वसूली होनी चाहिए।