जनादेश का फैसला आ चुका, अब इम्तिहान शुरू - सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी
जनता की सेवा, बुनियादी हक़ और अमन-इंसाफ पर कोई समझौता नहीं।
भारत समाचार न्यूज एजेंसी
जयपुर, राजस्थान।
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी साहब ने एक मजबूत और साफ़ संदेश देते हुए कहा कि जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। अब वक़्त है कि नेता सिर्फ सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि खिदमत की सियासत का सबूत दें। यह जीत या हार का नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी और जवाबदेही का दौर है। उन्होंने कहा कि चूंकि अभी सरकार का गठन और शपथग्रहण होना बाकी है, इसलिए सभी दलों को संयम, समझदारी और दूरदर्शिता का परिचय देना चाहिए।
*गांव हो या शहर, बुनियादी हक़ अब वादों में नहीं, ज़मीनी हक़ीक़त में दिखने चाहिए।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि अब जनता सिर्फ भाषण नहीं, नतीजे चाहती है। गांव की धूल भरी गलियों से लेकर शहर की भागती सड़कों तक, हर जगह इंसान अपने हक़ के इंतज़ार में है। पानी, बिजली, सड़क, इलाज, तालीम और रोज़गार, ये किसी पर एहसान नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी हक़ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में असली कसौटी यही होगी कि क्या गांवों तक स्वास्थ्य और शिक्षा की रोशनी पहुंचती है? क्या शहरों में व्यवस्था और रोजगार मजूबूत होता है? क्या हर गरीब, मज़दूर और किसान को इंसाफ और सहूलियत मिलती है?
*सत्ता सेवा का नाम है और विपक्ष जागरूकता का।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि जो भी दल सरकार बनाएगा, उसे याद रखना चाहिए कि सत्ता हुकूमत करने का नहीं, सेवा करने का नाम है और जो विपक्ष में बैठेंगे, उनकी जिम्मेदारी है कि वे सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि रचनात्मक निगरानी और सही मार्गदर्शन करें।
*नफ़रत की आग नहीं, मोहब्बत की रौशनी फैलाइए।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि चुनाव खत्म हो चुका है। अब अगर कोई नफरत, झूठ और अफवाह फैलाता है, तो वह सिर्फ समाज नहीं, बल्कि पूरे देश को नुकसान पहुंचाता है। हम सबको मिलकर यह तय करना होगा कि सियासत इंसानियत पर भारी न पड़े।
*आख़िरी पैग़ाम और दुआ।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने अपने पैग़ाम में कहा कि जनता का भरोसा सबसे बड़ी अमानत है और इस अमानत में खयानत की कोई गुंजाइश नहीं। उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह तआला हमारे मुल्क और इन राज्यों को अमन, तरक्की और खुशहाली से नवाज़े और हमारे नेताओं को ईमानदारी, इंसाफ और सच्ची खिदमत की तौफीक अता फरमाए।