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Mon, 13 Apr 2026 04:29 PM
धार्मिक / Dec 13, 2025

ईर्ष्या व गुनाहों से सख्ती के साथ बचें :-कारी अनस नक्शबंदी

चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

जाफरा बाजार में इस्लामी भाईयों के लिए चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला सब्जपोश हाउस मस्जिद में आयोजित की गई। कार्यशाला के नौवें सप्ताह में हसद व जलन और गुनाहों से बचने का तरीका बताया गया।

मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि इस्लाम में हसद (ईर्ष्या) एक गंभीर पाप है। यह मानसिक शांति और खुशी को नष्ट कर देता है।‌‌ हसद नेकियों को उसी तरह खा जाता है जैसे आग लकड़ी को जला देती है। हसद से चुगली, निंदा, गाली-गलौज और यहां तक कि किसी को नुकसान पहुंचाने जैसे अन्य पाप पैदा हो सकते हैं। जब ईर्ष्यालु व्यक्ति ईर्ष्या करे तो उसकी बुराई से बचने के लिए अल्लाह की शरण ले। अल्लाह से नियमित रूप से दुआ करें कि वह आपके दिल को हसद, द्वेष और घृणा से शुद्ध करे। अल्लाह के फैसलों पर पूरा विश्वास रखें और जो कुछ आपके पास है उस पर संतुष्ट रहें। याद रखें कि हर चीज अल्लाह की मर्जी से होती है। जिस व्यक्ति से ईर्ष्या हो, उसके साथ दयालु और विनम्र बनें, उसे उपहार दें या उसके लिए खुशी जाहिर करें। इस्लाम हसद को एक जहर मानता है जो ईमान को कमजोर करता है और इससे सख्ती से बचने का निर्देश देता है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम गुनाहों (पाप) से नफरत करने की शिक्षा देता है। साथ ही गुनाहगार से नहीं बल्कि उसके बुरे अमल से नफरत करने की शिक्षा दी जाती है। यह दृष्टिकोण दया, मार्गदर्शन और सुधार की इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित है। गुनाह अल्लाह की नाफरमानी और अवज्ञा का प्रतिनिधित्व करता है। पाप समाज में भ्रष्टाचार को जन्म देता है, व्यक्ति की अंतरात्मा को कमजोर करता है और अल्लाह की कृपा व आशीर्वाद को छीन लेता है। व्यक्ति को पाप करने वाले इंसान से नहीं, बल्कि उसके किए गए बुरे काम (गुनाह) से नफरत करनी चाहिए। इसका उद्देश्य अपराधी को अपमानित करने के बजाय उसे सुधार का अवसर देना है। इस्लाम में तौबा की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है और सच्चे दिल से की गई तौबा सभी गुनाहों को माफ करवा सकती है। इस्लाम चाहता है कि लोग गुनाहों से दूर रहें और उनसे नफरत करें, लेकिन गुनाहगारों को मार्गदर्शन और सुधार का रास्ता दिखाते हुए उनके प्रति दया और सहानुभूति का रवैया अपनाएं।

अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में हाफिज रहमत अली निजामी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ, शहबाज सिद्दीकी, ताबिश सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, याकूब, रूशान, जावेद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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