डॉ भीमराव अम्बेडकर ने उपेक्षित वर्गों को दिलाया संवैधानिक अधिकार।
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
डॉ भीमराव अंबेडकर ने दलित एवं वंचित समाज को
उनके सामाजिकअधिकार को दिलाते हुए उनकी पुण्यतिथि पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ।सत्याग्रह भवन में भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी,भारतीय संविधान के निर्माता,बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर एक सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ,इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों,छात्र छात्राओं ने भारी संख्या में भाग लिया इस अवसर पर संयुक्त रूप से श्रद्धांजलिअर्पित की गई
6दिसंबर को ही भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी एवं भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब भीमराव का निधन हुआ था। उनका सारा जीवन सामाजिक उत्थान , पिछड़ों एवं समाज के उपेक्षित वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहा। 1927 में हुए पानी पीने के हक की ऐतिहासिक लड़ाई "चावदार तालाब सत्याग्रह" आंदोलन हुआ था।इस आंदोलन की अगुवाई बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने की थी, जो 20 मार्च1927 को अंजाम दिया गया।महाराष्ट्र के रायगढ़ डिस्ट्रिक्ट के महाड़ स्थान पर,जो कि सार्वजनिक तालाब से अछूतों दलितों को पानी पीने और उपयोग करने के हक को हासिल कराने के लिए काफीअसरदार सत्याग्रह था। तालाबों पर पानी पीने के लिए जानवर तो जा सकते थे पलेकिन उसी तालाब से एक मनुष्य को जो किअछूत एवं समाज के उपेक्षित वर्ग से हो वो पानी पीने की अधिकार नहीं रखता था,भले ही प्यास से मर जाए।डॉ.अंबेडकर ने सार्वजनिक स्थलों से दबे कुचले,वंचित तबके को पानी पीने का अधिकार दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी, अगस्त1923 को बॉम्बे लेजिस्लेटिव काउंसिल एक प्रस्ताव आया। दलितों के चावदार तालाब से पानी लेने का पुरजोर विरोध कर रहे थे। चावदार तालाब कीओर लोग मार्च के लिए निकल पड़े। सभी दलितों को आखिरकार मिबॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी को तालाब का पानी पीनेऔर इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी।