शारदा नारायण हॉस्पिटल द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक कर किया सचेत
धनंजय शर्मा
मऊ, उत्तर प्रदेश।
ब्रेन स्ट्रोक वह स्थित है जब ब्रेन में जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है। ऐसी दशा में रक्त और ऑक्सीजन दोनों ही मस्तिष्क में नहीं पहुंच पाते हैं। इसमें मस्तिष्क की नस फटने जैसे मामले भी सामने आते हैं। रक्त फैलने व दबाव के कारण दिमाग की नसें दब जाती हैं। इसमें इस्कीमिक व हेमरेजिक दो प्रकाश के स्ट्रोक हो सकते हैं। इस्कीमिक जानलेवा नहीं होता पर हेमरेजिक स्ट्रोक से जान बचने की संभावना बहुत कम हो जाती है। ऐसे मरीज के लिए हर मिनट कीमती होता है। यही इस वर्ष की थीम भी है। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
डॉ संजय सिंह ने विश्व स्ट्रोक दिवस पर यह बातें बुधवार को कही। शारदा नारायण हॉस्पिटल से गाजीपुर तिराहा व फातिमा चौराहे तक आयोजित जन जागरूकता रैली को संबोधित कर रहे थे।
मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर सुजीत सिंह ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर सीपीआर का महत्व बताते हुए कहा कि ऐसे मरीज को सीपीआर करते हुए तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए। कहां की ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव करना आवश्यक होता है। अपनी दिनचर्या में योग एवं प्राणायाम को सम्मिलित करना आवश्यक है। शारदा नारायण नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेज पहसा गड़वा के विद्यार्थियों द्वारा शारदा नारायण हॉस्पिटल से निकली रैली गाजीपुर तिराहा होते हुए फातिमा चौराहा पर पहुंची जहां नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्ट्रोक के बारे में जागरूक किया गया इसके उपरांत मिर्जहाजी पूरा चौक एवं भोटी चौक पर भी लोगों को इस संदर्भ में जागरूक किया गया