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Sat, 07 Nov 2026 10:29 PM

90 दिन बाद भी मासूम का कोई सुराग नहीं, पुलिस प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा?

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

90 दिनों से लापता बच्चे का पुलिस प्रशासन को कोई सुरागअभी तक नहीं मिला है,

इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस प्रशासन नाकाम हो गई है,अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाने में सक्षम नहीं है, जबकि लौरिया का एक बच्चा को मात्र 6 घंटे में मिल जाता है,जबकि नरकटियागंज का फैजान 90 दिन बाद भी लापता है,क्या इंसाफ जाति,मजहब देखकर मिलेगा?आज पूरे 90 दिन हो गए,परिवार का इंतज़ारअब बेबसी में बदल चुका है।

आंखों मेंआंसू हैं,दिल में सवाल है,लेकिन पुलिस की झोलीअब भी खाली.

यह विडंबना ही कहा जाएगा कि पुलिस लौरिया केअनुज श्रीवास्तव के बेटे को पुलिस महज 6 घंटे में बरामद कर लेती है,लेकिन फैजान के मामले में 90 दिन बाद भी नतीजा शून्य निकला है।

परिजनों का दर्द साफ है कि—क्या हमारी जाति,धर्म ही पुलिस की सुस्ती की वजह? सवाल उठता है कि आखिर 90 दिन बाद भी मासूम फैजान कहां है?क्या बेतिया पुलिस ने हार मान ली?या फिर इंसाफ भी यहां धर्म,जाति को देखकर मिलता है?बेतिया पुलिस को अब जवाब देना ही होगा कि ये सिर्फ एक बच्चा नहीं,बल्कि एक मां-बाप की पूरी दुनिया है।इस घटना से पुलिस की कार्य शैली,कर्तव्यनिष्ठा, क्रियाकलाप, जातपात का भेद,गंदी मानसिकता,हिंदू मुस्लिम की राजनीति का खेल चल रहा है।इसी गंदी मानसिकता के चलते 90 दिन गुजर जाने के बाद भी फैजान जैसे मासूम बच्चे काअभी तक कोई सुराग पुलिस नहीं ढूंढ पाई है।पुलिस प्रशासन के लिए प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है किआखिर किस कारणवश 90दिनों से गायब मासूम बच्चा फैजान नहीं मिल रहा है। इस कांड से नाराज पूरे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में मायूसी छा गई है उन लोगों ने पुलिस प्रशासन पर खड़ा आक्षेप लगाया है,ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस प्रशासन एक ओर एक बच्चे को मात्र 6 घंटे में बरामद कर लेती है, मगर 90 दिनों के बाद भी फैजान जैसे मासूम बच्चा का कोई अता-पता नहीं पुलिस कर पा रही है। इस घटना से पुलिस प्रशासन पर कई तरह के प्रश्न खड़ा हो रहे हैं।

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