अदबी निगारिशात" पुस्तक का लोकार्पण 7 जून को, तैयारियां जोरों पर।
मोहम्मद आसिफ अत्ता):
हाजीपुर वैशाली बिहार।
इस्लाहे मिल्लत कमेटी वैशाली के तत्वावधान में डॉ. जफीरुद्दीन अंसारी, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा लिखित पुस्तक “अदबी निगारिशात” (आलोचनात्मक निबंधों का संग्रह) के भव्य लोकार्पण समारोह का आयोजन 7 जून 2026, रविवार, प्रातः 10 बजे से महाराणा प्रताप मैरिज हॉल, जिज्ञासा स्कूल के पास, अंजान पीर चौक से पश्चिम, हाजीपुर में किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर एजाज अली अरशद, पूर्व कुलपति, मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, पटना की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। वहीं एस. एम. परवेज आलम, अतिरिक्त सचिव सह निदेशक, उर्दू निदेशालय, कैबिनेट सचिवालय, बिहार सरकार के करकमलों द्वारा पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया जाएगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर ईद मोहम्मद अंसारी, पूर्व प्रो-वाइस चांसलर, मौलाना मजहरुल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय पटना, प्रोफेसर शहाब जफर आज़मी, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, पटना विश्वविद्यालय, प्रोफेसर आफताब अशरफ, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, मौलाना डॉ. शकील अहमद कासमी, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, ओरिएंटल कॉलेज पटना, डॉ. रेहान गनी, मुख्य संपादक दैनिक तस्दीक पटना, डॉ. असलम जावेदां, नाजिम-ए-आला, उर्दू काउंसिल हिंद पटना, फखरुद्दीन आरफी, महासचिव, हल्का-ए-अदब पटना तथा मास्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन अंसारी, अध्यक्ष, इस्लाहे मिल्लत कमेटी वैशाली शामिल होंगे। इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता उर्दू साहित्य की प्रतिष्ठित हस्ती प्रोफेसर फारूक अहमद सिद्दीकी, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू विभाग, बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर करेंगे। वहीं मंच संचालन की जिम्मेदारी डॉ. आरिफ हसन वस्तवी और मौलाना नजरुल होदा कासमी निभाएंगे। इस अवसर पर सैयद मिस्बाह उद्दीन अहमद, हाजीपुर पुस्तक पर अपना समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।
डॉ. मोहम्मद जफीरुद्दीन अंसारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यह लोकार्पण समारोह केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उर्दू भाषा की महानता, उसकी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का एक सुंदर माध्यम है। उन्होंने उर्दू से जुड़े लोगों, साहित्यकारों, कवियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उर्दू प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि उर्दू हमारी साझा सांस्कृतिक पहचान और विरासत है, जिसके विकास और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। साहित्यिक और बौद्धिक हलकों में इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह है और उम्मीद जताई जा रही है कि वैशाली सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में विद्वान, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और उर्दू प्रेमी इस कार्यक्रम में भाग लेकर उर्दू भाषा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देंगे।