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Sun, 17 May 2026 10:17 AM
धार्मिक / May 17, 2026

आज चांद देख तय होगी बकरीद पर्व की तारीख।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

इस्लामी माह जिलहिज्जा का चांद रविवार 17 मई की शाम देखा जाएगा। अगर चांद नजर आ गया तो ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व बुधवार 27 मई को मनाया जाएगा। अगर चांद नजर नहीं आया तो पर्व गुरुवार 28 मई को मनाया जाएगा। रविवार को उलमा किराम माहे जिलहिज्जा का चांद देखने की कोशिश करेंगे। चांद नजर आने या आसपास के जिलों से चांद की शहादत मिलने के बाद चांद का ऐलान करेंगे।

कुरआन में है कुर्बानी करने का हुक्म : मुफ्ती-ए-शहर

शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम में कुर्बानी को एक अहम मकाम हासिल है। अजमते इस्लाम व मुसलमान कुर्बानी में है। ईद-उल-अजहा पर्व माहे जिलहिज्जा का चांद देखे जाने पर 27 या 28 मई को मनाया जाएगा। मुसलमानों द्वारा लगातार तीन दिन तक कुर्बानी की जाएगी। 

मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि अल्लाह का कुरआन-ए-पाक में इरशाद है कि ‘ऐ महबूब अपने रब के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो’। ईद-उल-अजहा पर्व एक अजीम वालिद व पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व एक अजीम बेटे व पैगंबर हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी के लिए याद किया जाता है। पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम से मंसूब एक वाकया इस पर्व की बुनियाद है। कुर्बानी का जानवर जिब्ह करने के वक्त बंदों की नियत होती है कि अल्लाह राजी हो जाए, यह भी नियत रहती है कि मैंने अपने अंदर की सारी बदअख्लाकी और बुराई सबको मैंने इसी कुर्बानी के साथ जिब्ह कर दिया और इसी वजह से दीन-ए-इस्लाम में ज्यादा से ज्यादा कुर्बानी का हुक्म दिया गया है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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