Tranding
Tue, 12 May 2026 01:42 AM
धार्मिक / May 11, 2026

बरकाती मस्जिद नौरंगाबाद में खुली मकतब इस्लामियात व दारुल कुरआन की नई शाखा।

शिक्षा ही वह रोशनी है जो अज्ञानता के अंधेरे को मिटाती है - उलमा किराम 

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

बरकाती मस्जिद नौरंगाबाद गोरखनाथ में मकतब इस्लामियात व दारुल कुरआन शिक्षण संस्था की नई शाखा का उद्घाटन मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, मस्जिद के मुतवल्ली फिरोज अहमद व पार्षद नूर मुहम्मद ने किया। 

मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फर्ज है।‌ आलिम (ज्ञानी) की फजीलत इबादतगुजार पर वैसी ही है जैसे चौदहवीं के चांद की सितारों पर। एक सुदृढ़ समाज के निर्माण के लिए दीनी शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। दीनी शिक्षा इंसान को अल्लाह की इबादत, आखिरत की कामयाबी, हलाल व हराम और अच्छे-बुरे की समझ देती है, जबकि दुनियावी शिक्षा आधुनिक युग में आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक है। दीनी शिक्षा हमारा रूहानी और नैतिक विकास करती है, इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और जन्नत का रास्ता बताती है। मकतब इस्लामियात/दारुल कुरआन दीनी शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी प्रदान कर रहे हैं। इसमें अपने बच्चों का दाखिला जरूर करवाएं। 

शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि जो कौम शिक्षित और तकनीकी रूप से माहिर होती है, वही दुनिया में अपना मुकाम बना पाती है। दीनी शिक्षा जहां दिल और रूह को रोशन करती है, वहीं दुनियावी शिक्षा दिमाग और हाथों को हुनरमंद बनाती है। शिक्षा के इन दोनों रूपों का मेल अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर सही और गलत में फर्क करना सिखाता है। दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी के लिए इन दोनों का होना जरूरी है। मकतब इस्लामियात/दारुल कुरआन आधुनिक तकनीक का उपयोग करके बच्चों को दोनों तरह की शिक्षा प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। 

मकतब इस्लामियात/दारुल कुरआन के संयोजक कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी व हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि एक मुकम्मल और कामयाब इंसान बनने के लिए दीनी और दुनियावी शिक्षा का संतुलन बेहद जरूरी है। जहां दीनी शिक्षा हमें खुदा की पहचान और नैतिकता सिखाती है, वहीं दुनियावी शिक्षा हमें समाज में एक जिम्मेदार और हुनरमंद नागरिक बनाती है।दीनी शिक्षा इंसान की रूहानी और अखलाकी तरक्की के लिए बुनियादी चीज है। यह हमें अच्छे-बुरे और जायज-नाजायज के बीच फर्क करना सिखाती है। सही इल्म जन्नत के रास्ते को आसान बनाता है। धार्मिक शिक्षा हमें इंसानियत, बड़ों का एहतराम और दूसरों पर जुल्म न करने का पाठ पढ़ाती है। खुदा की रजा हासिल करने और इबादत के सही तरीकों को जानने के लिए यह शिक्षा लाजमी है। एक इंसान तभी पूरा होता है जब उसके पास अपने धर्म का ज्ञान हो और वह दुनियावी मामलों में भी माहिर हो। शिक्षा ही वह रोशनी है जो अज्ञानता के अंधेरे को मिटाती है। अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को मकतब इस्लामियात/दारुल कुरआन में भेजें ताकि बच्चों की दुनिया और आखिरत दोनों कामयाब हो सके। 

अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क की तरक्की व भाईचारे की दुआ मांगी गई। उद्घाटन में हाफिज रजी अहमद बरकाती, हाफिज आरिफ रजा, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, नेहाल अहमद, अली अहमद, बेलाल अहमद, शीराज अहमद सिद्दीकी, जीशान अहमद, मुहम्मद अख्लाक, एडवोकेट मुहम्मद कासिफ, हस्सान, जावेद अली, सैयद मतीन अहमद, सैयद नदीम अहमद, अब्दुस्समद, जीशान कुरैशी, रहमत अली, वसी अहमद, शेर मुहम्मद, मुहम्मद अयान, गजाली, हादी आदि मौजूद रहे।

-------------------------

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
2

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap