इमाम-ए-आजम हजरत अबू हनीफा के उर्स-ए-पाक पर छात्रों व अभिभावकों की काउंसलिंग।
एक संतुलित घर ही एक सफल बच्चे की नींव - मुजफ्फर हसनैन रूमी
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में हजरत सैयदना इमाम-ए-आजम अबू हनीफा रदियल्लाहु अन्हु के उर्स-ए-पाक पर छात्र/छात्राओं व अभिभावकों की काउंसलिंग (मार्गदर्शन) की गई। इमाम-ए-आजम की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। मदरसे की छमाही परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सना फातिमा को बहारे शरीअत और शिफा खातून, फिजा खातून, खुशी नूर, शालिबा खान व शिफा नूर को किताबों व इनाम से नवाजा गया।
मुख्य वक्ता सेंट्रल एकेडमी तारामंडल के वरिष्ठ शिक्षक मुजफ्फर हसनैन रूमी ने कहा कि एक संतुलित घर ही एक सफल बच्चे की नींव होता है। आज के दौर में बच्चों और अभिभावकों दोनों की काउंसलिंग एक अनिवार्य आवश्यकता है। अपने घर में सकारात्मक वातावरण बनाएं। शैक्षणिक दबाव, प्रतियोगिता और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण बच्चे अक्सर तनाव और चिंता का शिकार हो जाते हैं। मां बाप उनसे खुद दोस्ती कर उन्हें इन भावनाओं को प्रबंधित करना सिखाएं। जिद्दीपन, गुस्सा या एकांत में रहने जैसी समस्याओं को सही मार्गदर्शन और सकारात्मक तरीकों से हल किया जा सकता है। सही उम्र में मां बाप की सूझ बूझ और उनका मार्गदर्शन बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता पहचानने में मदद करता है, जिससे वे भविष्य के लिए बेहतर निर्णय ले पाते हैं। बच्चों की सफलता पर अभिभावक को चाहिए कि वह बच्चों को प्रोत्साहित व पुरस्कृत कर हौसला बढ़ाएं।
अध्यक्षता करते हुए शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि 80 हिजरी में कूफा (इराक) में जन्मे इमाम-ए-आजम अबू हनीफा ने इल्म-ए-फिकह (इस्लामी न्यायशास्त्र) की ऐसी व्यवस्था दी, जिस पर आज भी विश्व की अधिकांश मुस्लिम आबादी अमल करती है। इमाम-ए-आजम ने पैगंबर ए इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम के बहुत से साथियों (सहाबा किराम) से भी मुलाकातें कर उनसे हदीसें भी रिवायत की हैं।
संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि इमाम-ए-आजम अबू हनीफा इस्लामी दुनिया के महान विद्वान और फकीह (इस्लामी न्यायशास्त्र के ज्ञाता) हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने जाहिरी जीवनकाल में ही इमाम-ए-आजम अबू हनीफा के बारे में बशारत (शुभ संदेश) दे दिया था। आपकी प्रतिष्ठा आपके जीवनकाल में ही बहुत ऊँची थी। आपकी विद्वतापूर्ण विरासत और आपकी याद आज भी जीवित है।
अंत में दुरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। कार्यक्रम में असगरी खातून, शबाना खातून, नूर जहां, सादिया नूर, मुबश्शिरा कुरैशी, मुअज्जमा कुरैशी, इरम परवीन, साहिबा खातून, गुल अफ्शां खातून, मुहम्मद सफियान, अब्दुल समद, जलालुद्दीन, रहमत अली सहित तमाम लोग मौजूद रहे।