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धार्मिक / Jan 09, 2026

सब्जपोश हाउस मस्जिद में मेराज शरीफ का वाकया बयान हुआ।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत से आगाज हुआ। नात-ए-पाक पेश की गई। मेराज शरीफ का वाकया बयान हुआ। नमाज पढ़ने का सही तरीका सिखाया गया।

मुख्य वक्ता शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि अल्लाह पाक ने अपने आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को रात के एक थोड़े से हिस्से में मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक्सा तक की सैर कराई। इसका जिक्र अल्लाह पाक की सच्ची किताब कुरआन-ए-पाक में भी मौजूद है। मस्जिद-ए-अक्सा में नबी पाक हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सारे नबियों को नमाज पढ़ाई। उनकी इमामत फरमाई। और वहां से आसमान, जन्नत व दोजख, अर्श-ए-आजम और लामकां की सैर करते हुए अल्लाह पाक की खास बारगाह में हाजिर हुए। माथे की आंखों से अल्लाह पाक की तजल्लियों का दीदार फरमाया। मेराज शरीफ में ही अल्लाह पाक ने अपने प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत को नमाज का तोहफा दिया। रात के थोड़े से हिस्से में नबी पाक हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इतना लंबा सफर तय करना। वक्त का गोया ठहर जाना। फासलों का सिमट जाना। आसमान की बुलंदियों के पार जाना। वगैरह-वगैरह बातें आज भी दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरत में डाले हुए है। और आज भी यह बातें इंसानी अक्ल को शोध करने की दावत दे रही हैं। 

संचालन करते हुए हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा अल्लाह पाक अपने नबियों को मोजजा देकर दुनिया में भेजता है। मोजजा उन बातों को कहते हैं जो किसी नबी से ऐलाने नबुव्वत के बाद जाहिर हो और उसका होना आम तौर पर नामुमकिन हो। अल्लाह पाक अपने नबियों को मोजजा इसलिए देकर भेजता है कि जिद्दी दिल ओ दिमाग रखने वाले लोग भी इसे देख कर ईमान ले लाएं। मोजजा नबी के सच्चे होने का सबूत है। अल्लाह पाक के आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह पाक ने अनगिनत मोजजे अता फरमाए। जिनमें चांद को टुकड़े करना, डूबे सूरज को वापस बुलाना, उंगलियों से पानी के चश्मे जारी होना वगैरह-वगैरह शामिल है। इन्हीं मोजजात में एक अहम मोजजा मेराज का है जिसे इसरा का मोजजा भी कहते हैं।  

अंत में दुरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में शांति, तरक्की व भाईचारगी की दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। संगोष्ठी में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, हाजी बदरूल हसन, हाजी सलीम, रूशान, जावेद, मो. अरीब, मो. आयान, मो. आसिफ, जीशान आदि मौजूद रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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