तकबीरे तशरीक पढ़ना वाजिब है, बुधवार से पढ़ी जाएगी - हाफिज रहमत
ईद-उल-अजहा : सेवईंयों का बाजार सज कर तैयार।
अरफा के दिन रोजा रखने की बहुत फजीलत है।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
ईद-उल-अजहा त्योहार गुरुवार 28 मई को है। उर्दू बाजार, नखास चौक, घंटाघर, जाफरा बाजार, गोरखनाथ आदि जगहों पर सेवईंयों का बाजार सज चुका है। जहां मोटी, बारीक, लच्छेदार के साथ कई वैराइटीज की सेवईंयां मौजूद हैं, जो गुणवत्ता और अपने नाम के मुताबिक डिमांड में है। बाहर व आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी करने शहर आ रहे हैं।
उर्दू बाजार स्थित ताज सेवईं सेंटर के मुहम्मद कैस व मुहम्मद आरिफ ने बताया कि उनके यहां छड़ व सादी सेवईं, छत्ते वाली सेवईं, किमामी सेवईं, बनारसी, भुनी सेवईं, लाल लच्छा, सफेद लच्छा, बनारसी लच्छा, सूतफेनी, रूमाली, दूध फेनी आदि बिक रही है। इस समय सबसे ज्यादा मांग में बनारसी किमामी सेवईं है, जो हाथों हाथ खरीदी जा रही है। ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा में सेवईं की खूब बिक्री होती है।
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम में कुर्बानी देना वाजिब है। उन्होंने बताया कि बुधवार 27 मई को फज्र की नमाज से लेकर हर फर्ज नमाज के बाद तकबीरे तशरीक बुलंद आवाज से पढ़ी जाएगी। जिसका सिलसिला रविवार 31 मई की असर की नमाज तक जारी रहेगा। जमात से जो नमाज अदा की जाएगी उसमें ही तकबीरे तशरीक पढ़ी जाएगी। नौवीं जिलहिज्जा के फज्र से तेरहवीं के असर तक हर फर्ज नमाज के बाद सभी नमाजियों को एक मर्तबा तकबीरे तशरीक ‘अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर ला इलाहा इल्लल्लाह वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द’ बुलंद आवाज से पढ़ना वाजिब है और तीन बार अफजल है। अरफा (9 जिलहिज्जा) के दिन रोजा रखने की बहुत फजीलत हदीस शरीफ में आई है। अरफा इस बार बुधवार 27 मई को पड़ रहा है।
ईद-उल-अजहा पर सजा बकरों का बाजार, खरीदारी तेज।
अल्लाह के नाम पर कुर्बानी देने का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) 28, 29 व 30 मई को अकीदत व परम्परागत तरीके से मनाया जाएगा। मुस्लिम घरों में तैयारियां शुरु हो गई है। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों व घरों में कुर्बानी के बकरे आसानी से देखे जा सकते हैं। कुर्बानी के लिए बकरों के बाजार में चहल पहल काफी बढ़ गई है। त्योहार नजदीक आते ही शहर के विभिन्न इलाकों में बकरों की मंडियां सजने लगी है। लोग कुर्बानी के लिए स्वस्थ और तंदुरुस्त जानवरों की तलाश में बाजार पहुंच रहे हैं। त्योहार के करीब आते ही बकरों का बाजार गुलजार है।
मुहम्मद नदीम ने बताया कि जामा मस्जिद उर्दू बाजार के निकट, जाफरा बाजार, इलाहीबाग, जाहिदाबादा, खूनीपुर सहित तमाम जगहों पर बकरे बिक रहे हैं। जहां व्यापारी अपने खास नस्ल के बकरे बेच रहे हैं। बाजार में देशी, बरबरी, तोतापरी, जमनापारी जैसी नस्लों के बकरे उपलब्ध हैं। कुछ बकरे अपने खास वजन, कद-काठी व नस्ल के कारण आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कई बकरों के नाम सलमान, टाइगर, सुल्तान, शेरू जैसे लोकप्रिय नामों पर रखे गए हैं। वहीं अगर कीमत की बात की जाए तो अकीदतमंदों को ग्रामीण इलाकों में साढ़े सात से दस हजार रुपये में बकरा मिल जा रहा है। वहीं बाजार में बकरों की कीमत दस हजार रुपए से बीस हजार रुपए के बीच है। जबकि खास नस्ल के बकरों की मांग पच्चीस से पचास हजार रुपये तक पहुंच रही है।
सैयद नदीम अहमद ने बताया कि स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी व्यापारी बेहतरीन बकरे लेकर गोरखपुर पहुंच रहे हैं। लोग अपनी पसंद और बजट के मुताबिक मोल-भाव भी खूब कर रहे हैं।
बड़े जानवर में हिस्सा लेने की तैयारी शुरु ।
जहां कुर्बानी के लिए बकरे बिके रहे हैं वहीं बड़े जानवर (भैंस) में हिस्सा लेने के लिए भी तैयारी शुरु है। लोगों ने पेशगी रकम जमा करानी शुरु कर दी है। काबिलोगौर कि हर साल शहर में तकरीबन 44 स्थानों पर बड़े जानवर भैंस व पड़वा की कुर्बानी तीन दिनों तक हर्षोल्लास के साथ होती है। रहमतनगर के अली गजनफर शाह ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी बड़े जानवर में प्रत्येक हिस्से के एवज में 3500, 4000 व 4500 रुपया लिया जा रहा है। कुर्बानी शरीअत के मुताबिक होगी। लोग कुर्बानी में अकीका भी करवा सकते हैं।
खोखर टोला के वरिष्ठ शिक्षक मुहम्मद आजम ने बताया कि शहर में कुर्बानी तीन दिनों तक हर्षोल्लास के साथ होती चली आ रही है। एक भैंस में सात लोगों की तरफ से कुर्बानी दिए जाने का नियम है।
हज अदा करने के लिए मक्का शरीफ में हैं हजारों भारतीय मुसलमान ।
इस्लामी माह जिलहिज्जा में देश व दुनिया के लाखों मुसलमान हज अदा करते हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में हज यात्री मक्का शरीफ पहुंचे हुए हैं। हज पर गए तकिया कवलदह के मुहम्मद वसीम ने बताया कि हज यात्री इबादत में मशगूल हैं। 25 मई से हज के अरकान शुरू हैं। जो 27 मई तक जारी रहेंगे। भारत के लिए खुसूसी दुआ होगी। इस बार गोरखपुर से करीब 117, देवरिया से 35, कुशीनगर से 17, महराजगंज से 71 लोग मुकद्दस हज यात्रा पर गए हुए हैं।
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