अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष रोजगार की कमी से मजदूरों का पलायन, विभागीय योजना का लाभ क्यों नहीं- सुरैया सहाब
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार
प्रतिवर्ष मजदूर दिवस या मई दिवस को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है,मगर मजदूरों की समस्या,पलायन रोटी रोजी, की कमी को दूर करने का कोई पुख्ता इंतजाम सरकार के द्वारा नहीं किया जा रहा है, रोजगार की कमी से मजदूरों का पलायन नित्यदिन एक राज्य से दूसरे राज्य में हो रहा है,विशेष तौर पर वैसे राज्य जहां रोजगार प्रचुर मात्रा में नजरआती है, वहां मजदूर पलायन कर रहे हैं,इनकी बेबसी, मजबूरी, रोटी रोजी की समस्या, परिवार का पालन पोषण, मुख्य मुद्दा बनता जा रहा है। सरकार की ओर से इन पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है इनके लिए कई तरह के योजनाएं बनाई जा रही है,मगर उनको सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे पलायन की समस्या उत्पन्न हो रही है।विभाग की योजनाओं का लाभ इनको सही ढंग से नहीं मिल रहा है, जिससे वह लाभान्वित नहीं हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार की गारंटी नहीं मिलने के कारण 40% मजदूर पलायन पर मजबूर हैं रोजगार के साधन नहीं होने के कारण यहां के मजदूर दिल्ली, पंजाब,हरियाणा, महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश, गुजरात,केरला, चेन्नई जैसे राज्यों में रोटी रोजी हेतु पलायन कर रहे हैं। पश्चिम चंपारण जिले की 70%आबादी किसान की है,जो खेतीबारी में लगे हुए हैं,जिले अंतर्गत आंकड़े के अनुसार 13 लाख मजदूर निबंधित है। जिले में शुगर फैक्ट्री को छोड़कर दूसरा कोई फैक्ट्री याअन्य साधन नहीं है, जहां मजदूरों की खपत की जाए, जहां उनको रोटी रोजगार मिल सके।विभिन्न स्तर के मजदूरों ने संवाददाता को बताया कि काम नहीं मिलने के कारण मजबूरी में दूसरे राज्यों में इस जिले के मजदूर प्लायन करने पर मजबूर हैं। रोटी रोजी, पालन पोषण,जीवन यापन प्रत्येक परिवार के लिए जरूरी है।यहां सालों भर काम नहीं मिलता है, 5 से 6 महीना ही काम मिलता है, बाकी दोनों बैठकर झक मारना पड़ता है,खाने खाने को लाले पडते हैं,परिवार भूखा रहता है।जिला में बाढ़ और सुखाड़ के कारण भी बेरोजगारी बढ़ जाती है, बड़े-बड़े प्लांट और प्रोजेक्ट में बाहर के मजदूर आकर काम करते हैं, जिससे यहां के मजदूरों की स्थिति दयनीय हो जाती है।प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जिले के आबादी के हिसाब से 40% परिवार मजदूरी पर निर्भर रहते हैं।सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी भी सही ढंग से नहीं मिलती है। संवाददाता ने बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन पर मजदूरों से मुलाकात होने पर उन लोगों ने बताया कि बड़ी मुश्किल से यहां 300 से ₹400 मजदूरी प्रतिदिन मिलती है, जो परिवार के पालन पोषण के लिए इस महंगाई की दौर में बहुत ही कम है,इससे मजदूरों का परिवार भूखा रहजाता है।श्रम संसाधन विभाग के द्वारा भी प्रचार प्रसार की कमी से निर्माण मजदूर, अन्य प्रकार के मजदूरों को उचित लाभ समय पर नहीं मिल पाता है, योजनाओं का लाभ पाने के लिए मोटी रकम सुविधा शुल्क के रूप में अदा करनी पड़ती है। जिला कार्यालय में दो दर्जन सेअधिक बिचौलिया दलाल काम करते हैं,जिनके माध्यम से पैसा खर्च करने के बाद भी लाभ मिलने में देरी लगती है,श्रम संसाधन विभाग में बिचौंलिया हावी है, इसकी विधिवत जांच होनी चाहिए। महीनो कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी कोई काम नहीं मिल रहा है, मजदूरों का कोई डाटाबेस भी नहीं बन रहा है।
रोटी रोजी मजदूरी की तलाश में शहर के विभिन्न चौक चौराहा पर मजदूरों की मंडी लगती है,जहां लोग पहुंचकर मजदूरों कोअपने साथ लेकर अपने काम कराने के लिए घर तक ले जाते हैं,विशेष रूप से छावनी चौक,सोआ बाबू चौक,लाल बाजार चौक, स्टेशन चौक,बस स्टैंड चौक, शांति चौक, तीनलालटेन चौक
राज देवढी चौक पर मजदूरों की मंडी लगती है। मजदूरों की शिकायत है कि श्रम संसाधन विभाग में बिचौलियों का कब्जा है,ब्रगैर रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता है,खाते मेंअनुदान की राशि जाने पर विभाग के बिचौंलिया 50% राशि जबरन वसूल कर लेते हैं।