Tranding
Mon, 02 Mar 2026 04:08 AM
धार्मिक / Mar 01, 2026

हजरत खदीजा की याद में हुई फातिहा ख्वानी

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पहली बीवी उम्मुल मोमिनीन (मोमिनों की मां) हजरत सैयदा खदीजा तुल कुबरा रदियल्लाहु अन्हा की याद में फातिहा ख्वानी हुई। उनकी जिंदगी पर रोशनी डाली गई। उनका यौमे विसाल (निधन) दस रमजान को हुआ था। 

कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि हजरत खदीजा बहुत बुलंद किरदार, आबिदा और जाहिदा महिला थीं। हजरत खदीजा ने गरीब मिस्कीनों की मिसाली इमदाद (मदद) की। अपने व्यापार से हुई कमाई को हजरत खदीजा गरीब, अनाथ, विधवा और बीमारों में बांटा करतीं थीं। हजरत खदीजा ने अनगिनत गरीब लड़कियों की शादी का खर्च भी उठाया और इस तरह एक बेहद नेक और सबकी मदद करने वाली महिला के रूप में दीन-ए-इस्लाम ही नहीं पूरे विश्व के इतिहास में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जब ऐलाने नबुव्वत किया तो महिलाओं में सबसे पहले ईमान लाने वाली महिला हजरत खदीजा थीं। खातूने जन्नत हजरत फातिमा जहरा उन्हीं की बेटी हैं।

शिफा खातून ने कहा कि हजरत खदीजा का मक्का शरीफ में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था। उनका कारोबार कई दूसरे मुल्कों तक होता था। हजरत खदीजा की बताई तालीमात पर अमल करके दुनिया की तमाम महिलाएं दीन व दुनिया दोनों संवार सकती है। हजरत खदीजा बेवा (विधवा) थीं। उन्होंने पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अख्लाक, किरदार, मेहनत, लगन और ईमानदारी से प्रभावित होकर निकाह का पैगाम भेजा, जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया। उस वक्त पैगंबर-ए-इस्लाम की उम्र 25 साल जबकि हजरत खदीजा की उम्र चालीस साल थी। इस तरह हजरत खदीजा पैगंबर-ए-इस्लाम की पहली बीवी बनीं। अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। 

रहमत का अशरा खत्म, मगफिरत का शुरु।

शनिवार की शाम रहमत का अशरा खत्म हो गया। माह-ए-रमजान का दसवां रोजा व पहला अशरा रहमत का अल्लाह की इबादत में बीता। रोजेदारों ने रोजा, नमाज, तिलावत, तस्बीह, सदका व जकात के जरिए अल्लाह को राजी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। तहज्जुद, इशराक, चाश्त, सलातुल अव्वाबीन, सलातुल तस्बीह की नमाज कसरत से पढ़ी गई। दस दिन तक अल्लाह की खास रहमत मुसलमानों पर बराबर बरसी। नेकियों व रोजी में वृद्धि हुई। 

वही रमजान का दूसरा अशरा मगफिरत का शुरू हो गया। रोजेदारों की पूरी कोशिश रहेगी कि वह खूब इबादत कर अल्लाह से मगफिरत तलब करें। बाजार में खरीदारी रफ्तार पकड़ रही है। 

हुसैनी मस्जिद शाहपुर पादरी बाजार के इमाम मौलाना शादाब अहमद रजवी ने बताया कि तीस दिनों तक चलने वाले इस मुकद्दस रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। रमजान का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत, तीसरा जहन्नम से आजादी का है। मालूम हुआ कि यह महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से आजादी का महीना है। लिहाजा इस रहमत, मगफिरत और जहन्नम से आजादी के ईनाम की खुशी में हमें ईद मनाने का मौका मिलेगा।


इफ्तार की दुआ रोजा खोलने के बाद पढ़नी चाहिए : उलमा किराम 

रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर शनिवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा। 

1. सवाल : इफ्तार की दुआ कब पढ़नी चाहिए? 

जवाब : इफ्तार की दुआ रोजा खोलने के बाद पढ़नी चाहिए। पहले बिस्मिल्लाह करके रोजा खोल लें इसके बाद इफ्तार की दुआ पढ़ें।

2. सवाल : क्या जकात के पैसों से इफ्तार करा सकते हैं? 

जवाब : नहीं जकात के पैसों से इफ्तार नहीं करा सकते हैं। हां उन पैसों से राशन वगैरा खरीद कर किसी गरीब को मालिक बना दें तो जकात अदा हो जाएगी।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
2

Leave a comment

logo

Follow Us:

Flickr Photos

© Copyright All rights reserved by Bebaak Sahafi 2026. SiteMap