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धार्मिक / Aug 22, 2025

कुल शरीफ के साथ मना आला हजरत का 107वां उर्स-ए-पाक।

आला हजरत को शिद्दत से किया गया याद।

-मदरसा रजा-ए-मुस्तफा में हुआ क्विज कॉम्पिटिशन 

-इमामबाड़ा पूरब फाटक पर जलसा।

-नूरी मस्जिद पर बांटा गया लंगर।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

शहर में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमा का 107वां उर्स-ए-पाक अकीदत व मुहब्बत के साथ मनाया गया। हर तरफ एक ही नारा गूंजा इश्क मुहब्बत-इश्क मुहब्बत, आला हजरत-आला हजरत। मस्जिद, मदरसा, घर व सोशल मीडिया पर आला हजरत को शिद्दत से याद किया गया। उलमा किराम ने तकरीर में आला हजरत की जिंदगी के हर पहलू पर रोशनी डाली। इमामबाड़ा इस्टेट पूरब फाटक मियां बाजार, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार व चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर आदि में उर्स-ए-आला हजरत के मौके पर महफिल सजी। कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी की गई। नात व मनकबत पेश हुई। कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। अकीदतमंदों में लंगर बांटा गया।

मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में सीरते आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमा पर क्विज कॉम्पिटिशन हुआ। जिसमें मुहम्मद सफियान, अदीबा फातिमा, सना फातिमा, शिफा खातून, फिजा खातून, शालिबा खान, खुशी नूर, उम्मे ऐमन, सादिया नूर, मुअज्जमा कुरैशी, लाइबा फातिमा, साहिबा खातून को नायब काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी व ट्रैवेल प्वाइंट के नेहाल अहमद ने पुरस्कृत किया। 

संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि आला हजरत इमाम अहमद रजा खां अलैहिर्रहमा द्वारा किया गया कुरआन पाक का उर्दू में तर्जुमा ‘कंजुल ईमान’ व ‘फतावा रजविया’ बेमिसाल है। आला हजरत 14वीं व 15वीं सदी हिजरी के अजीम मुजद्दिद हैं। जिन्हें उस समय के प्रसिद्ध अरब व अजम के विद्वानों ने यह उपाधि दी। आला हजरत ने हिंद उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में अल्लाह और पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति प्रेम भर कर पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नतों को जिंदा किया। आप सच्चे समाज सुधारक थे। आप मुल्क से बहुत मुहब्बत करते थे। अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी गई।

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में महफिल सजी। मौलाना असलम रजवी ने कहा कि आला हजरत पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर जानो दिल से फिदा व कुर्बान थे। तकरीर के बाद कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। अकीदतमंदों में लंगर बांटा गया। महफिल में मौलाना मकसूद आलम, शाबान अहमद, अलाउद्दीन निजामी, अशरफ निज़ामी, मनोव्वर अहमद, हाजी जलालुद्दीन कादरी, आकिब अंसारी, मिनहाज सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।

नौजवान कमेटी की ओर से इमामबाड़ा पूरब फाटक मियां बाजार पर जलसा हुआ। उलमा किराम ने कहा कि आला हजरत ने 13 साल की उम्र से ही फतवा लिखना और लोगों को दीन-ए-इस्लाम का सही पैगाम पहुंचाना शुरू कर दिया। पूरी उम्र दीन की खिदमत में गुजारी। जलसे में हाफिज आरिफ रजा, कारी अब्दुस्समद, नफीस अत्तारी, रजाउल मुस्तफा आदि मौजूद रहे।

सब्जपोश हाउस मस्जिद में हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि आला हजरत को अल्लाह व पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सच्ची मुहब्बत और गहरा इश्क था। जिसको आपने ‘हदाइके बख्शिश’ में नात व मनकबत के जरिए बयान किया है। 

चिश्तिया मस्जिद में मौलाना महमूद रजा कादरी ने कहा कि दुनिया में एक वक्त ऐसा आया कि सिक्के कम होने लगे और करेंसी नोटों को बढ़ावा मिलने लगा। उस समय कई बड़े आलिम करेंसी के नोटों का प्रयोग करने के संबंध में गहमा गहमी का शिकार थे। आला हजरत ने शरीअत की रोशनी में एक किताब लिखकर करेंसी नोटों के प्रयोग को जायज बताया। आला हजरत ने इसका ऐसा फैसला किया कि पूरी दुनिया ने इसे तस्लीम (स्वीकार) किया। इस सिलसिले में उनकी तहकीकात और किताबें देखी जा सकती हैं। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व अमान की दुआ मांगी गई।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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