दुनिया अस्थायी, अनंत जीवन आखिरत का - हाफिज रहमत अली
इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला का समापन
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों की विशेष कार्यशाला हुई। कार्यशाला के अंतिम सप्ताह में आखिरत के बारे में बताया गया। कार्यशाला का फाइनल सेमिनार व पुरस्कार वितरण समारोह फरवरी माह में आयोजित किया जाएगा।
मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि एक दिन यह दुनिया खत्म हो जाएगी और अल्लाह सभी मृत लोगों को दोबारा जीवित करेगा। आखिरत में हर इंसान के दुनिया में किए गए अच्छे और बुरे कामों का हिसाब होगा। जिन लोगों के कर्म अच्छे होंगे और जो ईमान लाए होंगे, उन्हें जन्नत मिलेगी। वहीं, बुरे कर्म करने वालों को जहन्नम में जाना होगा। आखिरत में विश्वास का उद्देश्य मनुष्य को इस दुनिया में नैतिक और जिम्मेदार बनाना है, ताकि वह मृत्यु के बाद अल्लाह के सामने जवाबदेह हो सके। दुनिया अस्थायी है और असली व अनंत जीवन आखिरत का ही है।
संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही वह इस दुनिया से चला जाता है। मृत्यु के बाद शरीर व आत्मा एक अलग अवस्था (बरजख) में रहते हैं, जहां कब्र में मुनकर और नकीर नामी फरिश्ते सवाल-जवाब करते हैं। कयामत (अंतिम प्रलय) के दिन दुनिया खत्म होगी और सभी को फिर से जीवित उठाया जाएगा। सभी लोगों को हश्र के मैदान (मैदान-ए-कयामत) में जमा किया जाएगा। कर्मों का हिसाब होगा और पुल सिरात (एक पुल) को पार करना होगा। अंत में, अच्छे कर्मों वालों को जन्नत और बुरे कर्मों वालों को जहन्नम मिलेगी। मृत्यु अंत नहीं, बल्कि अनंत जीवन की शुरुआत है। यह दुनिया अस्थायी है और आखिरत की जिंदगी हमेशा के लिए है। जब दुनिया खत्म होगी, सभी मृतकों को फिर से जीवित किया जाएगा, अल्लाह पाक उनके कर्मों का फैसला करेगा और उन्हें उनके कर्मों के अनुसार जन्नत या जहन्नम भेजेगा।
दरूद बॉक्स बनाने वाली सना खातून, आइरा, सादिया महजबीन, जारा खान व उमरा को पुरस्कृत किया गया। अंत में दरूद ओ सलाम पढ़कर भारत में शांति व विकास की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में ज्या वारसी, आस्मां खातून, शीरीन आसिफ, आयशा खातून, शबनम, नूर सबा, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, नौशीन फातिमा, सना फातिमा, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया अख्तर, अख्तरून निसा, अलीशा खातून, सादिया नूर, खुशी नूर, मंतशा, रूमी, शीरीन बानो, समीना बानो, शबाना, सिदरा, सानिया, उम्मे ऐमन, शीरीन आसिफ, सना खातून, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, आफरीन सहित तमाम इस्लामी बहनें मौजूद रहीं।
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