चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला का आयोजन ।
तौहीद का अर्थ है अल्लाह को एक मानना : कारी अनस नक्शबंदी
अल्लाह की रहमत हर प्राणी के लिए है - हाफिज रहमत
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
इस्लामी बहनों व इस्लामी भाईयों के लिए जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा व मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला में तौहीद, जन्नत और अल्लाह पाक की रहमत के बारे में बताया गया।
मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस कादरी नक्शबंदी ने कहा कि इस्लाम धर्म के अनुसार तौहीद जन्नत में प्रवेश करने की सबसे जरूरी शर्त है। जो लोग तौहीद पर ईमान रखते हैं और नेक काम करते हैं, उन्हें जन्नत हासिल होती है, जो अल्लाह की बनाई हुई एक अनंत और सुख-समृद्धि वाली जगह है। तौहीद का अर्थ है अल्लाह को एक मानना। यह इस्लाम का मूल सिद्धांत है। तौहीद पर सच्चा विश्वास ही ईमान की नींव है। बिना तौहीद के कोई भी नेक काम अल्लाह की बारगाह में कबूल नहीं होता। जो कोई सच्चे दिल से 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहता है, वह जन्नत में दाखिल होगा। यह जन्नत की चाबी है। जन्नत अल्लाह के नेक बंदों के लिए बनाई गई एक ऐसी जगह है जहां हमेशा की खुशी और सुकून मिलता है। जन्नत में अल्लाह का दीदार करना सबसे बड़ी नेमत होगी। जन्नत में प्रवेश केवल उन लोगों को मिलेगा जो अल्लाह की आज्ञाकारिता में जीवन समर्पित करते हैं।
विशिष्ट वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि अल्लाह की रहमत का अर्थ है अल्लाह की दया या कृपा। अल्लाह की रहमत हर प्राणी के लिए है। दुनिया में सभी को मिलती हुई हर चीज जैसे हवा, पानी और भोजन, उसकी रहमत का ही हिस्सा है। अल्लाह जानता है कि इंसान गलतियां करते हैं, इसलिए वह पछतावा करने वालों को माफ कर देता है, जो उसकी रहमत का एक उदाहरण है। अल्लाह से रहमत पाने के लिए, इंसान को अच्छे इरादे और अच्छे कर्म करने चाहिए। जो लोग नेक काम करते हैं, उनके लिए अल्लाह की दया बहुत करीब है।
अंत में दरूदो सलाम पढ़कर अमन व शांति की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, शहबाज सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, ताबिश सिद्दीकी, हाजी फैज अहमद, मुहम्मद जैद, मुहम्मद आजम, नावेद आलम, महबूब आलम, अली गजनफर शाह, ज्या वारसी, नौशीन फातिमा, शबनम, नूर सबा, शीरीन आसिफ, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, सना फातिमा, जिक्रा शेख, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया, मुअज्जमा कुरैशी, सादिया नूर सहित तमाम लोगों ने शिरकत की।