लोकसभा चुनाव के सातों चरणों में बेरोजगारी रहा निर्णायक फैक्टर- कॉंग्रेस
रिपोर्ट विनोद विरोधी
गया, बिहार।
बिहार प्रदेश कॉंग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता प्रो विजय कुमार मिट्ठू ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 के शुरू होने के कुछ दिनों पहले तथा चुनाव के दौरान देश के कई प्रमुख सर्वे करने वाले संस्थानों के सर्वेक्षण में बेरोजगारी एक निर्णायक फैक्टर के रूप में सामने आ रही है।उन्होंने कहा कि ऐसे में यह आश्चर्य का विषय है कि भाजपा ने अपने चुनावी अभियान या अपने घोषणापत्र में इस मुद्दे पर बात करने की भी जरूरत नहीं समझी,तो दूसरी ओर कॉंग्रेस सहित इंडिया गठबंधन में शामिल सभी दलों ने बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा मानते हुए इसे समाप्त करने के उपाय हेतु अपने चुनावी प्रचार तथा घोषणापत्र में केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में खाली 30 लाख पदों को भरने तथा देशभर के बेरोजगार युवाओं को 8500 रुपया प्रतिमाह देने की घोषणा की है।उन्होंने कहा देश के गृहमंत्री अमित साह ने बेरोजगारी जैस प्रमुख चुनावी मुद्दा पर दिए गए साक्षात्कार में कहा कि 130 करोड़ की आबादी में किसी भी सरकार के लिए सरकारी नौकरियां, या रोजगार देना असम्भव है, जबकि मोदी सरकार पहली बार 2014 में सत्तासीन होने से पहले देश के 2 करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा किया है, लेकिन दस साल के शासनकाल में प्रति वर्ष दो लाख भी नौकरी नहीं दिया।उन्होंने कहा कि अंत तो तब हुआ जब कोरोना महामारी के दौरान देश के 1 लाख 50 हजार सेना के लिए चयनित छात्रों को नियुक्ति पत्र देने के बजाय सेना में भी चार वर्षो के लिए अग्निपथ योजना शुरू करने से देश के छात्र युवाओ में भारी आक्रोश है।उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश में विगत कुछ वर्षो में कई बार छात्र नौजवान की हिंसा भी भड़की है , जब नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार पेपर लीक और सरकारी भर्ती को अचानक रद्द करने के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। बढ़ती बेरोजगारी को लेकर युवाओ में गुस्सा उबल रहा है।