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Sat, 07 Nov 2026 10:12 PM

1974 से आज ज्यादा स्थिति भयावह , निपटने के लिए युवाओं को ही आगे आना होगा- प्रो.नायक

रिपोर्ट:विनोद विरोधी 

गया, बिहार।

महंगाई , बेरोजगारी , भ्रष्टाचार , नौकरशाही सारी सीमाएं पार कर रहा है । 1974 से आज भयावह स्थिति है । सरकारों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है । उक्त बातें बोधगया प्रखंड स्थित सिलौंजा के लॉड बुद्वा होम फॉर चिल्ड्रेन के सभागार में लोक समिति,मजदूर-किसान समिति और जेपी लोकतंत्र सेनानी संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जेपी ने संपूर्ण क्रांति की उद्घोषणा 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में थी।1990 के दशक से अभी तक बिहार के सत्ता पर जेपी के आंदोलन में शामिल लोगों का कब्जा है फिर भी नौकरशाही और भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनती है।ऑफिसर , कर्मचारी बेखौफ और बेलगाम हो गये हैं ।किसान,मजदूर बेहाल है । उन्होंने युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि युवा आगे आएं और आंदोलन करें।अध्यक्षीय भाषण के क्रम में लोक समिति के राष्ट्रीय संयोजक कौशल गणेश आजाद ने कहा कि जेपी जिस आर्थिक विषमता को पकने की बात किए थे आज उसका उल्टा हो रहा है। विषमता बढ़ती जा रही है । चंद लोगों के पास पूंजी का संकेंद्रण हो रहा है । देश के एक प्रतिशत के पास संसाधन का चालीस प्रतिशत हिस्सा है तो बाकी के पास क्या होगा ? समझा जा सकता है । उन्होंने कहा कि सरकार डीजल , पेट्रोल , घरेलू गैस का कीमत बढ़ा कर पूंजीपतियों का खजाना भर रही है।उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ा कर सरकार ने साबित कर दिया कि सरकार की नीति बड़े लोगों के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि विषमता पर आधारित समाज को बदलने के लिए बड़े आंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसे युवा ही कर सकते हैं । उपेंद्र सिंह ने कहा कि बिहार की शहर के आसपास के गांवों को शहरीकरण करने पर तुली है । जिससे चंद पूंजीपतियों को फायदा होगा।किसानों और मजदूरों का दोहन और शोषण होगा । उन्होंने तुरंत इस योजना पर रोक लगाने की मांग की।जगदेव सिंह ने कहा कि जेपी 74 में जनेऊ तोड़ने की बात कही थी लेकिन आज भी जनेऊ धारण कर रहे हैं जिससे सामाजिक विषमता बढ़ती है । पुतुल कुमारी ने कहा कि जेपी महिला - पुरुष गैरबराबरी के खिलाफ थे । केंद्र की सरकार संसद में मात्र 30% आरक्षण की बात करती है , उसे भी लटकाये हुए है । बिशुनधारी यादव ने कहा कि जेपी जोतने वाले के पास जमीन होने के पक्षधर थे लेकिन आज सरकार मंदिर और मठ की जमीन दखल करने के नाम पर गरीबों को जमीन से बेदखल करने की साज़िश रच रही है।मौके पर जनार्दन यादव , मनमोहन प्रसाद , अंकित कुमार , गौतम कुमार , राजेन्द्र मांझी आदि मल्लू मांझी ने अपने विचार व्यक्त किए । संचालन बालेश्वर ने किया । परिचर्चा में सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल थे ।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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